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लेखकों के ध्यानार्थ :

  • गोरखपुर सोशल साइंटिस्ट पत्रिका में लेख कृतिदेव 10 तथा फॉण्ट 14 में ए-फोर साइज में भेजें।
  • शोधपत्र ऑनलाइन ही स्वीकार किए जायेंगे।
  • शोधपत्र अधिकतम 5000 तथा न्यूनतम 3000 शब्दों के बीच लिखे होने चाहिए।
  • शोधपत्र लिखने के लिए सन्दर्भ साँचे का प्रयोग करें। बिना समुचित सन्दर्भ दिए लेख/आलेख/शोधपत्र स्वीकार नहीं किए जायेंगे।
  • पत्रिका किसी अतिरिक्त लाभ के लिए प्रकाशित नहीं की जाती है। इसलिए मानकों से समझौता नहीं किया जाता है।
  • पीडीएफ फाइल के साथ वर्ड फाइल में अवश्य भेजें।
  • यदि शोधपत्र लिखने में समस्या आ रही है तो सम्पादक अथवा सम्पादक मण्डल से बेहिचक सम्पर्क किया जा सकता है।
  • सम्पादकीय सम्पर्क के लिए 9451512113 पर व्हाट्स एप करें अथवा फोन करें।
  • अपनी रचनाएँ anandkumarpandey6337@gmail.com पर भेजें।
  • प्रत्येक दशा में शोधपत्र के मौलिक और अप्रकाशित होने का स्वप्रमाणित पत्र ईमेल के माध्यम से भेजें।
  • सम्पादकीय पता – 415 जेल बाईपास रोड, गोरखपुर (उ0प्र0) 273014 है।
  • प्रतियाँ प्राप्त करने के लिए भुगतान करें। इसके लिए दिए गये नम्बर पर सम्पर्क करें।
  • अपने मित्रों, अन्य शोधार्थियों व संस्थाओं को भी पत्रिका के विषय में बताएं। यह हमें अनुगृहीत करेगा।

सन्दर्भ कैसे दें :

अ >> केवल सन्दर्भ सूची में नाम देने पर निम्नवत् लिखना चाहिए –
पहले लेखक का नाम उसके बाद कोष्टक में प्रकाशन वर्ष फिर किताब का नाम फिर प्रकाशक का नाम अन्त में प्रकाशन की जगह। उदाहरण –
रामशरण शर्मा (2021) शूद्रों का प्राचीन इतिहास, राजकमल प्रकाशन प्रा०लि०, नयी दिल्ली।


आ >> फुटनोट देने पर सम्बन्धित पृष्ठ संख्या लिखी जानी चाहिए। जैसे –
रामशरण शर्मा (2021) शूद्रों का प्राचीन इतिहास, राजकमल प्रकाशन प्रा०लि०, नयी दिल्ली पृष्ठ 210। यदि एक ही किताब से बार-बार सन्दर्भ देना है तो वही लिखकर पृष्ठ सं० लिखना पर्याप्त होगा।


इ >> अनूदित किताबों के लिए निम्नवत् लिखना चाहिए – अनूदित किताबों को सन्दर्भ में लिखने का तरीका यथावत है बस इसमें अनुवादक का नाम, किताब के नाम लिखा जाना चाहिए जैसे –
सत्यद सिल्वे हसन (2022) मूसा से मार्क्स तक, उर्दू से अनुवाद : डॉ० फिदा हुसैन गार्गी प्रकाशन, नई दिल्ली।


ई >> सम्पादित किताब में छपे लेख के लिए ऐसे लिखें –
डॉ० मृदुला झा ‘फासीवाद’, अनिरुद्ध देशपाण्डे (सं०) विश्व इतिहास के प्रमुख मुद्दे: बदलते आयाम, हिंदी माध्यम कार्यान्वय निर्देशालय दिल्ली विश्व विद्यालय, नयी दिल्ली पृष्ठ 140-155


उ >> पत्रिका में छपे लोग इस प्रकार उद्धृत करें –
उदाहरण देखें डॉ० बल्लीन्दर (2022) ‘स्मार्ट फोन : पूँजीवादी लूट का औजार,’ देश-विदेश, नेयतकालीन, अंक - 40 (अप्रैल) : 17


ऊ >> वेबसाइट से ली गई सामग्री को ऐसे लिखें –
http://en.wikipedia.org/wiki/Mahatma_Gandhi, दिनांक 15.01.2023 को देखा गया। जैसा वेब पता दिखे पूरा ठीक-ठीक अंकित करें। वेबसाइट के साथ देखे जाने की तिथि जरूर लिखें।

ए >> जर्नल में छपी सामग्री को लिखने का यह तरीका होता है।
इसमें लेखक का नाम (कोष्टक में प्रकाशन वर्ष) फिर लेख का नाम पत्रिका का नाम, खण्ड व अंक का नाम, किस पृष्ठ से किस पृष्ठ तक, और जरूरी हो तो किसी विशेष पृष्ठ की संख्या लिखी जानी चाहिए।
गोमती चेलानी (2018) भारत में संघवाद की नूतन प्रवृत्तियाँ : सहकारी संघवाद के विशेष सन्दर्भ में, भारतीय राजनीति विज्ञान शोध पत्रिका वर्ष 10 अंक 2 (जुलाई-दिसम्बर) 370-375

ऐ >> अखबार से ली गई सामग्री को ऐसे लिखना ठीक रहता है –
अमर उजाला ब्यूरो, मुलायम ने माना- अखिलेश सुप्रीमो, अमर उजाला, लखनऊ 18 जनवरी, 2017।
अखबार में लिखी रिपोर्ट, साक्षात्कार सभी को एक क्रम से लिखेंगे। जैसे साक्षात्कार का उल्लेख इस प्रकार करेंगे कि सभी तथ्यात्मक जानकारी आ जाये। पाठक आसानी से उम्र तक पहुँच सके।
पहले साक्षात्कार देने वाले का नाम फिर साक्षात्कार किस शीर्षक से प्रकाशित है पुनः साक्षात्कार लेने वाले का नाम। पत्रिका / किताब / अखबार का नाम फिर अंक का क्रमांक एवं अन्त में पृष्ठ संख्या लिखी जायेगी।

औ >> सन्दर्भ देने में पूरी ईमानदारी और सावधानी बरतनी चाहिए। यह आसान और ईमानदारी भरा है। यह लेख / शोधपत्र की प्रामाणिक विश्वसनीय और भौतिक बनाता है। थोड़ा सा ध्यान देकर आप हमें आसानी से कर सकते हैं।