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गोरखपुर सोशल साइंटिस्ट शोध पत्रिका की आरम्भ स्वर्गीय प्रो. अशोक सक्सेना की प्रेरणा और नेतृत्व में अकादमिक क्षेत्र में गंभीर शोध को बढ़ावा देने उसे प्रोत्साहित करने और जन्मोन्मुखी बनाने के लिए की गई. हम गौरवान्वित हैं की हम अपने उद्देश्य में पूर्णतया सफल रहे हैं. अकादमिक तटस्थता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रासंगिकता और सामाजिक उपभोगिता को समर्पित विकासमान है.
यह पत्रिका लम्बे समय से गंभीर शोधार्थियों के बीच लोकप्रिय रही है। इसका उद्देश्य अपने समय में अकादमिक मानक को बनाये रखने में मदद देने के साथ - साथ गुणवत्तापूर्ण मानवीय संसाधन तैयार करना है। व्यावसायिकता और उपभोगतावादी संस्कृति से प्रतिरोघ करते हुआ यह समाज के पक्ष में अकादमिक जगत के ज्ञान और संवेदना का इस्तेमाल करने का उद्देश्य रखता है।
अ >> केवल सन्दर्भ सूची में नाम देने पर निम्नवत् लिखना चाहिए –
पहले लेखक का नाम उसके बाद कोष्टक में प्रकाशन वर्ष फिर किताब का नाम फिर प्रकाशक का नाम अन्त में प्रकाशन की जगह।
उदाहरण –
रामशरण शर्मा (2021) शूद्रों का प्राचीन इतिहास, राजकमल प्रकाशन प्रा०लि०, नयी दिल्ली।
आ >> फुटनोट देने पर सम्बन्धित पृष्ठ संख्या लिखी जानी चाहिए। जैसे –
रामशरण शर्मा (2021) शूद्रों का प्राचीन इतिहास, राजकमल प्रकाशन प्रा०लि०, नयी दिल्ली पृष्ठ 210।
यदि एक ही किताब से बार-बार सन्दर्भ देना है तो वही लिखकर पृष्ठ सं० लिखना पर्याप्त होगा।
इ >> अनूदित किताबों के लिए निम्नवत् लिखना चाहिए –
अनूदित किताबों को सन्दर्भ में लिखने का तरीका यथावत है बस इसमें अनुवादक का नाम, किताब के नाम लिखा जाना चाहिए जैसे –
सत्यद सिल्वे हसन (2022) मूसा से मार्क्स तक, उर्दू से अनुवाद : डॉ० फिदा हुसैन गार्गी प्रकाशन, नई दिल्ली।
ई >> सम्पादित किताब में छपे लेख के लिए ऐसे लिखें –
डॉ० मृदुला झा ‘फासीवाद’, अनिरुद्ध देशपाण्डे (सं०) विश्व इतिहास के प्रमुख मुद्दे: बदलते आयाम, हिंदी माध्यम कार्यान्वय निर्देशालय दिल्ली विश्व विद्यालय, नयी दिल्ली पृष्ठ 140-155
उ >> पत्रिका में छपे लोग इस प्रकार उद्धृत करें –
उदाहरण देखें डॉ० बल्लीन्दर (2022) ‘स्मार्ट फोन : पूँजीवादी लूट का औजार,’ देश-विदेश, नेयतकालीन, अंक - 40 (अप्रैल) : 17
ऊ >> वेबसाइट से ली गई सामग्री को ऐसे लिखें –
http://en.wikipedia.org/wiki/Mahatma_Gandhi, दिनांक 15.01.2023 को देखा गया। जैसा वेब पता दिखे पूरा ठीक-ठीक अंकित करें। वेबसाइट के साथ देखे जाने की तिथि जरूर लिखें।
ए >> जर्नल में छपी सामग्री को लिखने का यह तरीका होता है।
इसमें लेखक का नाम (कोष्टक में प्रकाशन वर्ष) फिर लेख का नाम पत्रिका का नाम, खण्ड व अंक का नाम, किस पृष्ठ से किस पृष्ठ तक, और जरूरी हो तो किसी विशेष पृष्ठ की संख्या लिखी जानी चाहिए।
गोमती चेलानी (2018) भारत में संघवाद की नूतन प्रवृत्तियाँ : सहकारी संघवाद के विशेष सन्दर्भ में, भारतीय राजनीति विज्ञान शोध पत्रिका वर्ष 10 अंक 2 (जुलाई-दिसम्बर) 370-375
ऐ >> अखबार से ली गई सामग्री को ऐसे लिखना ठीक रहता है –
अमर उजाला ब्यूरो, मुलायम ने माना- अखिलेश सुप्रीमो, अमर उजाला, लखनऊ 18 जनवरी, 2017।
अखबार में लिखी रिपोर्ट, साक्षात्कार सभी को एक क्रम से लिखेंगे। जैसे साक्षात्कार का उल्लेख इस प्रकार करेंगे कि सभी तथ्यात्मक जानकारी आ जाये। पाठक आसानी से उम्र तक पहुँच सके।
पहले साक्षात्कार देने वाले का नाम फिर साक्षात्कार किस शीर्षक से प्रकाशित है पुनः साक्षात्कार लेने वाले का नाम। पत्रिका / किताब / अखबार का नाम फिर अंक का क्रमांक एवं अन्त में पृष्ठ संख्या लिखी जायेगी।
औ >> सन्दर्भ देने में पूरी ईमानदारी और सावधानी बरतनी चाहिए। यह आसान और ईमानदारी भरा है। यह लेख / शोधपत्र की प्रामाणिक विश्वसनीय और भौतिक बनाता है। थोड़ा सा ध्यान देकर आप हमें आसानी से कर सकते हैं।